चली चली रे दरस को मैँ चली रे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

चली चली रे दरस को मैं चली रे,

चली कान्हा जी की ओर,

थामे भक्ति की डोर,

चली बाँके बिहारी की गली रे,

चली चली रे दरस को मैं चली रे........

कान्हा मंद मंद मुसकाये,

नयनों से बाण चलाये,

निरखि अद्भुत श्रृंगार,

गयी दिल मैं तो हार,

तोरी मोहिनी सूरत लागे भली रे,

चली चली रे दरस को मैं चली रे........

कान्हा कैसी प्रीत लगायी,

मन तड़पत मीन की नाईं,

तेरी लीला है अपार,

हुआ तुमसे यह प्यार,

हमरी अँखियाँ हैं जब से ये मीली रे,

चली चली रे दरस को मैं चली रे..........

तुम्हे छोड़ कहाँ अब जाऊँ,

तेरा हरपल दरसन पाऊँ,

सुन मेरे सरकार,

चाहूँ तेरा दीदार,

खड़ी द्वार जोड़े अंजली रे,

चली चली रे दरस को मैं चली रे........

आभार: ज्योति नारायण पाठक

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।