मुझपर तो कृपा कर दो मेरे पारसनाथ

पारंपरिक
महादेव भजन जैन भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मैं करू वंदना तेरी, ओ मेरे पारसनाथ,

मुझपर तो कृपा कर दो मेरे पारसनाथ,

चरणों में तुमको शीश नवाऊं, नाथ तुम्हे कैसे पाऊं,

दरश बिना व्याकुल रहता हूं, पलभर चैन नहीं पाऊं,

मेरे जीवन मे अब कर दे, तु कृपा की बरसात,

मुझपर तो कृपा कर दो मेरे पारसनाथ......

दुःख की तो परवाह नहीं हैं, सुख की कोई चाह नहीं,

सच्चा तो शिवपथ हैं प्रभुजी, और कोई मेरी राह नहीं,

मेरे जनम मरण को मेटो, बस इतनी सी हैं बात,

मुझपर तो कृपा कर दो मेरे पारसनाथ......

डोल रही भव भव में नैय्या, अब तो पार लगा दे तु,

छाए संकट के बादल हैं, संकट मेरा मिटा दे तु,

एक तुझसे आस हैं मेरी, मैं जपु तुम्हे दिन रात,

मुझपर तो कृपा कर दो मेरे पारसनाथ......

अश्वसेन के राजदुलारे, वामा देवी के प्यारे,

नाग-नागिनी तारनेवाले, पारस तुम सबसे न्यारे,

मुझे महामंत्र सिखलादो, मैं जपु मंत्र दिन रात,

मुझपर तो कृपा कर दो मेरे पारसनाथ......

मैं करू वंदना तेरी, ओ मेरे पारसनाथ,

मुझपर तो कृपा कर दो मेरे पारसनाथ..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।