ओ छलियाँ खूब छला

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ओ छलियाँ खूब छला,

मेरा ऐसा किया भला,

मैं तन मन फूक चला,

तेरे दर से जब निकला,

ये सोचा घड़ी दुःख की टल जाएगी,

दया से तेरी ये किस्मत मेरी बदल जाएगी,

मीत तूने प्रीत की ये खूब कदर जानी,

सारी यारी पे तूने फेर दिया पानी,

आया था सोच कर तू दवारिका दीस है,

देगा खजाना मेरा यार जगदीश है,

दर पे आया धोखा खबर क्या थी किस्मत धागा खाये गई,

तेरी दोस्ती भी आंसू कभी यु बरसाए गी,

ओ छलियाँ खूब छला........

कहते है दुःख में कोई यार नहीं होता कभी महल से झोपड़ी का प्यार ही होता,

कब रंक राजा के दिल होये है करीब के,

कब धन वाले हुए मीत ये गरीब के,

तूने सदा सुनली कहा सबल से निर्बल की न बन पये गी,

फिर तुम को ही क्यों सुदामा पे यु दया आये गी,

ओ छलियाँ खूब छला,

यारा वो जो सुख दुःख में शामिल हो जाते है,

उधर दर्द हो इधर नीर नैना बरसते है,

ऐसी ना रीत तूने प्रीत की निभाई रे,

या मैंने यार तेरी देख ली खुदाई रे

गम की घटा ना हो सदा,

कभी तो फसल सुख की सरसाये गी,

गाजेसिंह की खिजा ज़िंदगी वी मुस्काये गी,

ओ छलियाँ खूब छला,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।