तुम पास पास रहना

विनोद अग्रवाल
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तुम पास पास रहना तुम साथ साथ रहना,

राही नया नया हूँ हमराही बन कर रहना,

राहे है टेढ़ी मेढ़ी गलियां बड़ी अँधेरी,

ना कोई अशीना है वीरान दुनिया मेरी,

दिल के करीब रहना बन के हबीब रहना,

राही नया नया हूँ हम राही बनके रहना,

तूम पास पास रहना.......

जीवन के इस सफर में भूली हुई डगर में,

काफ़िल न हो मैं जाऊं माया के इस नगर में,

तुम यार बनके रहना गमख्वार बनके रहना,

राही नया नया हूँ हम राही बनके रहना,

तूम पास पास रहना.........

जाने बहार तुम हो दिल का करार तुम हो,

खमोश जिंदगी के साजो का तार तुम हो,

मेरे लबो पे हरदम तुम नगमा बनके रहना,

राही नया नया हूँ हम राही बनके रहना,

तूम पास पास रहना........

तुम मेरी जिंदगी हो तुम मेरी बंदगी हो,

मैं तुम में ही खो जाऊं एक तुम में रूह जमी हो,

नित नव मिलन के रोज पैगाम देते रहना,

राही नया नया हूँ हम राही बनके रहना,

तूम पास पास रहना.........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।