बड़ा उपकार तेरा

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

बड़ा उपकार तेरा सहनु सेवा दे विच लाया,

कवा किवे लफ्जा विच अस्सा जो जो तह्तो पाया,

बड़ा उपकार तेरा ......

सुख विच सहनु दितियाँ खुशियाँ,

दुःख विच सयम बक्सा,

अंग संग रह के हर दम किती रक्षक बन के रक्षा,

दुआ हर एक मन लई,

बोहता न कदे सताया,

बड़ा उपकार ...........

बूंद तो वी घट हस्ती साड़ी पर एहसास समंदर,

एह सब तेरी दात वे दाता तू बस दामन अंदर,

हमेशा वास करी एह घर तू आप वसाया,

बड़ा उपकार तेरा.......

परदे पाए एबा उते जखम दिला दे सीते,

असली पल ओ जीवन दे जो तेरे चरनी बीते,

करा की की सिफ्ता रज रज तुहा रजाया,

बड़ा उपकार तेरा ....

डूब डूब जावे साहिल दा दिल जब जब तेनु भूले,

याद तेरी संजीवनी नी भुट्टी देंदी सुख अनमुले,

मेहरबानी तेरी तुसा हर दम साथ निभाया,

बड़ा उपकार तेरा .........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।