पवन पुत्र दे दर तो झोली भर के आना है,

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

मैनु दर्शन होये सवेरे सोहने महावीर जी तेरे,

ओह ता मचिया भाना है,

पवन पुत्र दे दर तो झोली भर के आना है,

बाहुबली है मालिक है सारी दुनिया दा,

एहे जग जांदा बालक सारी दुनिया दा,

मैं रोज ध्याना है,

पवन पुत्र दे दर तो झोली भर के आना है,

ओ चुटकी दे विच पर्वत राख बना दिंदा,

नजर करे ता सारे कष्ट मिटा दिंदा,

मैं हवन करवाना है,

पवन पुत्र दे दर तो झोली भर के आना है,

ओहने नजर मेहर ते कर दिती साऱ्या ते,

नाले विंडल वाले राहे गए सयरया ते,

सूखे ने भजन वी गाना है ओहदा मनया भाना है,

पवन पुत्र दे दर तो झोली भर के आना है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।