संगतां बड़ीयां, दर ते खड़ीयां

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

संगतां बड़ीयां, दर ते खड़ीयां, आई ना वारी मेरी दातीये।

सुखना दे नाल, आईआं घडीयां, आई ना वारी मेरी दातीये॥

सखनी चोलो अड़ खलोता, दाती तेरे द्वार ते।

कोई सहारा जद ना मिलेया, आ गया दरबार ते।

नैना छम छम लाईआं झड़ीयां, आई ना वारी मेरी दातीये॥

की मिलेगा तैनू मैया, लाल दा दिल तोड़ के।

छड दे रोसा, सुन लै मेरी, मैं खड़ा हथ्थ जोड़ के।

देदे दर्शन ना कर अड़ीयां, आई ना वारी मेरी दातीये॥

देख मेरा हाल दाती, पत्थर वि माँ रो पये।

या मेरी परवाह नहीं या, मेरे नसीबे सो गए।

कीते तरले मिन्नत्तान बड़ीयां, आई ना वारी मेरी दातीये॥

भोली मैया भोले बछड़े, गल्लां करदे भोलिआं।

वेख तेरे वेहड़े नच्दे, बन के आए टोलीयां।

सब दे चेहरे लालीआं चडीयां, आई ना वारी मेरी दातीये॥

याद तेरी विच जाग जागे के, राता कई ने गुजारिआं।

तू ना आई मैं नैना दीया खुलिआन रखीयां बारीयाँ।

तू सबना दीया बावा फड़ीयां, आई ना वारी मेरी दातीये॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।