जय कालेश्वर दाता

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॥ पावन पाठ ॥

जय कालेश्वर दाता हम सबके भाग्यविदाता,

तूने कैसी खेल रचाई साथ थीड़ा में बैठ के सारे भक्तो के कष्ट मिटाये,

जय कालेश्वर दाता हम सबके भाग्यविदाता,

जय हो बाबा जय हो बाबा

अंतर यामी हो बाबा सबके मन की तू जाने,

जब भक्तो पर तेरी दया है लगते ख़ुशी बरसाने,

तेरी माया का भरा समन्दर जिसका छोर न पाए ,

साथ थीड़ा में बैठ के सारे भक्तो के कष्ट मिटाये

प्रेम का ऐसा बंधन है को तोड़े से न टूटे,

धन दौलत का क्या भरोसा आज मिले कल छूटे कल छूटे,

तेरी किरपा की चाय सबका जीवन सफल बनाये,

साथ थीड़ा में बैठ के सारे भक्तो के कष्ट मिटाये

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।