ये धरती अम्बर सारा

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॥ पावन पाठ ॥

ये धरती अम्बर सारा श्री कालेश्वर ने सवारा,

अब हम ये कहे देवा से के तेरे सिवा कोई नहीं,

तर जाता है जीवन उसका मिलता बाबा का ज सहारा,

अब हम ये कहे देवा से की तेरे सिवा कोई नहीं,

तेरे मंदिर में घंटा वाजे शीश ऊपर छतर है साजे,

तेरा संधुरी रंग ये बाबा सारे भक्तो को खूब भाये,

सबके पालक है तू महा दानी तेरी महिमा की लाखो कहानी,

मेरे दाता तू साथ निभाता इस जगत में न तेरा कोई सानी,

क्या पर्वत क्या समंदर सब तेरी दया पे निर्भर,

अब हम ये कहे देवा से के तेरे सिवा कोई नहीं,

हे बाबा मिलने तुजे सब तेरे दरबार चले,

तेरी करुणापा कर हम सब के घर बार चले,

कल क्या होगा हम न जाने हम तो बस इतना माने,

बिन तेरी दया के बाबा सब अपने लगे बेगाने,

नैनो में वासा लेना चरणों में जगह देना हमको,

अब हम ये कहे देवा से के तेरे सिवा कोई नहीं,

हमे बाबा नहीं भूलना छोड़ दूर हमें ना जाना,

भूल भक्तो की नादानियाँ सदा कल को बीच बसना,

जब जीवन की ये शाम ढले हमें तेरी कमी नहीं खले उस दिन इतना करना,

मंतर मुकति का मोक्ष मिले,

जीवन अब न सफल जो जाये हम सब भव सागर तर जाये,

अब हम ये कहे देवा से के तेरे सिवा कोई नहीं,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।