जीना राखियाँ तेरे ते माए डोरां

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जीना राखियाँ तेरे ते माए डोरां,

ओह तां कड़े डोल्दे नहीं।

डोल्दे नहीं, ओह मुहों बोलदे नहीं ॥

आवें नहीं घबराई दा,

बोल जैकारा माई दा॥

जेह्ड़े जेह्ड़े घर विच्च ज्योत तेरी जगदी,

ओहना नु नुसीब्ता दी हवा वी ना लगदी।

भावें आन मुसीबतां करोड़आं,

ओह ते कड़े डोल्दे नहीं॥

कण कण विच तेरी महक समाई ए,

ममता दी छा हेठां दुनिया वसई ए।

जीना चुम लईआं रावां दिया रोड़ा,

ओह ते कड़े डोल्दे नहीं॥

रूह रूह अंग अंग तेरा करजाई ए,

मंग्दिया लेखा एह तान तेरी वडाई है।

जीनु रहन तेरीआं लोडां,

ओह ते कड़े डोल्दे नहीं॥

झोली अड़ के बह गया, आ माँ दीदार दे,

लाखां पापी तर गए, नी मैनू वी माँ तार दे,

जीना राखियाँ तेरे ते माए डोरां,

ओह तां कड़े डोल्दे नहीं॥

तेरे जही माँ होवे, मेरे जेहा लाल माँ,

एस कोलो वद होर कहदा ए कमाल माँ।

करे जिन्ना दिया दूर माँ लोडां,

ओह ते कड़े डोल्दे नहीं ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।