नच नच के साई नु मनाइये,

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॥ पावन पाठ ॥

नच नच के साई नु मनाइये,

अवल यार है साई मेरा,

सोहना यार है साई मेरा,

उसनु आज रिजाइये,

नच नच के साई नु मनाइये,

जदो दी पाई साई नाल यारी भूल बैठा मैं दुनिया सारी,

यार मिले ये साई वरगा ज़िंदगी ओहदे दे लुटाइये,

नच नच के साई नु मनाइये,

यार मेरे दा अर्श ठिकाना,

धरती दा मैं बंदा निमाणा,

फिर भी निभावे यारी अपनी जद वि उसनु भुलैये,

नच नच के साई नु मनाइये,

साई मेरा मेरे दिल विच वसदा और किसी नु मैं अब नहीं लभदा,

एहदा यार मिले ता जिसनु रब्ब दा सुकर मानिये,

नच नच के साई नु मनाइये,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।