मैया किसने रंगा है ये गुलाभी चोला

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मैया किसने रंगा है ये गुलाभी चोला,

ये लगता प्यारा ये सबसे नयरा ये नैया तारे दुःख हर का सारे,

देख के इसको भक्तो का दिल डोला,

मैया किसने रंगा है ये गुलाभी चोला,

किस किस्मत वाले ने मैया गोटा इसे लगाया है,

कौन है जिसने तारो की झील मिल से इसे सजाया है,

तारो सा चमके बिजली सा धमके ये माँ को प्यारा,

करे जग उजारा गंगाजल में रंग गुलाभी गोला,

मैया किसने रंगा है ये गुलाभी चोला,

ब्रह्मा ने विष्णु से पूछा विष्णु जी ने शंकर से,

नदियों ने पर्वत से पूछा और धरती ने एम्बर से,

ये काज सवेरे ये कष्ट निवारे ये मंगल कारी ये संकट हारी,

सूरज ने चंदा से पूछा चनदा ये बोला

मैया किसने रंगा है ये गुलाभी चोला,

मेरे प्यारे भक्तो ने ही चोला मेरा बनाया है,

कभी न छूटे प्रेम आ ऐसा पका रंग चढ़ाया है,

करे आशा पूरी ये दिखता नूरी फूलो सा हस्ता हर दिल में वस्ता,

शेरावाली माता ने देखो ये भेद खोला,

मैया किसने रंगा है ये गुलाभी चोला,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।