सोहनी सूरत वालेया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सोहनी सूरत वालेया आ अखिया विच डेरा ला,

मोहनी मूरत वालेया हसदा हसदा मुख विखला,

चीरा दुकानदा तेरिया पाइया मूल ना मेरिया,

दो अखिया दी वेनती सहनु तू इतना ना तरसा

सोहनी........

अखिया ओले आसन तेरा तुआ वे ते मिटे अन्हेरा,

मेरे चन्द्रमां की तू काली रात हटा,

सोहनी........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।