गुरु महिमा

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

गुरुदेवा ओ म्हारा स्वामी देवा ।

चरण कमल री करु सेवा ॥

अधर आसन म्हारा ग़ुरुसा बिराजे ।

मै तो पँख़ी वाव ढुलावु देवा ॥1॥

कुँकु केसर अबीर गुलाल ।

मै तो चंदन तिलक लगावु देवा ॥2॥

चम्पो मरवो कली केवडो ।

फुलो रो हार पेरावु देवा ॥3॥

पान सुपारी दूध पताशा ।

मै तो मिश्री रो भोग लगावु देवा ॥4॥

सीरा पुरी और लापसी ।

मै तो लाडुडा रो भोग लगावु देवा ॥5॥

सतगुरु मिलिया नथेश्वर देवा ।

रघु चरणो में शीश नमावे देवा ॥6॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।