बस यही लिख दे माँ

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन दुर्गा भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

बस यही लिख दे माँ लिख दे तकदीर में मेरी,

इ माँ मैं राहु सदा सेवा में तेरी,

श्याम सवेरे मोर पंख की स्वर्णी माँ तेरा भवन बुहारू,

गंगा जल की भर के गगरियाँ तेरे चरण पखारू,

सुहा सुहा चोला गोटे वाला तुझको मैं पहनाओ,

तारो जड़ी चुनरियाँ तुझको मैं ोडाऊ,

बस यही लिख दे माँ लिख दे तकदीर में मेरी,

गोल कटोरी चांदी में माँ माथे तेरे लगाओ केसर का टिका,

हाथो से मैं अपने पिरो पहनाओ सूंदर हार फॉलो कलियों का,

भर के घी से पावन तेरी जोट जगाउ,हलवा चना ले पूरी का भोग लगाउ,

बस यही लिख दे माँ लिख दे तकदीर में मेरी,

माँ होठो पर हो नाम तुम्हारा नैन निहारे माँ सदा शवि तुम्हारी,

दर का भिखारी बन गया लाख तुमको याद सारी दुनिया बिषारी,

मांगे ना चंडी सोना ना महल चुबारे कमला सरल बस चाहे चौकठ पर गुजरा,

बस यही लिख दे माँ लिख दे तकदीर में मेरी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।