दुगी दुगी नदिया पुराना पेया वेहदा

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॥ पावन पाठ ॥

दुगी दुगी नदिया पुराना पेय वेहदा किसे न फडी मेरी बाह,

ओ आये मेरे सतगुरु प्यारे ओहना ने फड लाई मेरी भाह,

पास करा मेरा तबर कबीला ओहना ना फड़ी मेरी बाह,

जिह्ना टाइम करदा रह चोरियां ते ठगिया ओहना ना फड़ी मेरी बाह,

ओ आये मेरे सतगुरु प्यारे ओहना ने फड लाई मेरी भाह,

पास करे मेरे आस पडोसी ओहना ना फड़ी मेरी बाह,

जिहना दिया करदा रह पुरियां मैं गरजा ओहना न फदी मेरी बाह,

ओ आये मेरे सतगुरु प्यारे ओहना ने फड लाई मेरी भाह,

पास खड़े मेरे संगी ते साथी ओहना ना फड़ी मेरी बाह,

जिहना चिर करदा रह मौज ते मस्तियाँ ओहना न फड़ी मेरी बाह,

ओ आये मेरे सतगुरु प्यारे ओहना ने फड लाई मेरी भाह,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।