धन बरसाता है ये माल लुटाता है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

धन बरसाता है ये माल लुटाता है,

जब भी मेरी बारी आए पास बुलाता है,

भजन जो भी इसके गाए, ये खाटू छोड़कर आए,

दुखड़े भक्तों के मिटाकर, मेरा बाबा मुस्काए,

छाए दुख के बादल, जब भी दौड़ा आता है,

जब भी मेरी....

जो हर ग्यारस खाटू जाए, नसीबों वाला कहलाए,

निशान जो बाबा को चढ़ाए, कृपा बाबा कि वो पाए,

उसके घर में संकट, कभी नहीं आता है,

जब भी मेरी....

तमन्ना एक है मेरी, श्याम तुम दर्शन दे जाओ,

मेरे अंधियारे जीवन में, उजाला तुम लेकर आओ,

"पंकज" तेरे दर पे, झोली फैलाता है,

जब भी मेरी....

Singer-& wirter - Pankaj pareek..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।