आएंगे पौणाहारी जी दिल से बुला के देख

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॥ पावन पाठ ॥

दिल में जोगी के नाम की ॥ ज्योति जला के देख,

अाऐंगे, आऐंगे, आऐंगे पौणाहारी जी,

दिल से बुला के देख ॥

होगा असर दुआ में तो बोलेगी मुर्ति,

जीवन में हर काम की हो जाऐ पुर्ति,

ज्योति जगी है मंदिर में, आ आजमा के देख,

आऐंगे पौणाहारी जी दिल से बुला के देख ॥

किस्मत के ताले खोलना, बाबा के हाथ है,

एक तेरे कष्ट मेटना पल भर की बात है,

किस्मत के ताले खोलेगा, ताली बजा के देख,

आऐंगे पौणाहारी जी दिल से बुला के देख ॥

चरणों में बाबा के रहने से, होता दीदार है,

जिसने पुकारा दिल से भक्ति का सार है,

चरणों में जाके मांगले, तु सर को झुका के देख,

आऐंगे पौणाहारी जी दिल से बुला के देख ॥

दिल में जोगी के नाम की ॥ ज्योति जला के देख,

अाऐंगे, आऐंगे, आऐंगे पौणाहारी जी,

दिल से बुला के देख ॥

अशोक सितारा अम्बाला

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।