करूँ कैसे मैं शूकरणा झंडेवाली का

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

करूँ कैसे मैं शूकरणा झंडेवाली का,

झंडेवाली का मेहरा वाली का जोता वाली का,

मुझे घर में जगराता करवाना झंडेवाली का,

जबसे तेरी शरण में आया और न कुछ भी भाये,

ये जग सारा उसका हो जाये जो तेरा हो जाए,

घर आपने बना ठिकाना झंडेवाली का,

करूँ कैसे मैं शूकरणा झंडेवाली माँ का,

कोई न जाने तेरी माया जगदम्बे महा माया,

धरती एम्बर और पताल में तेरा नूर समाया,

हर कोई हर कोई है मस्ताना झंडे वाली का,

करूँ कैसे मैं शूकरणा झंडेवाली माँ का,

तेरी करनी कोई ना जाने आंबे आध भवानी,

वली और ये पीर पैगम्बर तेरा भरते पानी,

नीरज भी हुआ दीवाना झंडेवाली का,

करूँ कैसे मैं शूकरणा झंडेवाली माँ का,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।