कान्हा मेरी बाइयाँ योँ न मरोर

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कान्हा मेरी बाइयाँ को यू न मरोर

मटकी न फोड़ माखन खिलाउंगी

बाइयाँ न छोड़ी मेरी मटकी जो फोड़ि

देखेंगे लोग मैं भी इक रोज मैया को बताऊँगी,

काली गोहरी कपिला गाये का दूध मैंने मंगवाया,

दूध जामा कर दही बिलोकर माखन खूब बनाया

मैंने प्रेम से उसे निकाल कर माखन में मिश्री डालके,

लेके तेरा नाम सुबह और शाम वृन्धावन जाऊगी,

कान्हा मेरी बाइयाँ को यू न मरोर........

गोकुल के गवालो को लेकर वृन्धावन में आना,

माखन मिश्री खा कर कान्हा एक पहर रुक जाना,

चांदनी सी भीगी रात में सखियाँ भी होंगी साथ में,

तेरे संग श्याम वृन्धावन धाम रास रचाऊ गी माखन गिराऊ गी.

कान्हा मेरी बाइयाँ को यू न मरोर....

माखन के लालच में कही पकडे ना जाना,

बेस बना कर मेरी सखी का तुम बरसाने आना,

मुझे को डर लागे गाव का वैरी ना हो जाये श्याम का,

मेरी घनश्याम आजा मेरे गाव अखिय विछु गी,

शुबाश शर्मा ने लिखे कान्हा तेरे बोल बड़े अनमोल संजना सुनाये गी,

तेरे गुण गए गी,

कान्हा मेरी बाइयाँ को यू न मरोर

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।