राधा रानी जी के जन्म दिन की बधाई

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मैं तो भानु बाबा के डींग जाउंगी..

मैं तो भानु बाबा के डींग जाउंगी..

हाँ बधाई ले के आ..उं..गी..

अरे हाँ हाँ बधाई ले के आउंगी..

अरे हाँ... बधाई ले के आउंगी..

हाँ बधाई ले के आउंगी..

मैंने सुना है वहाँ लाली भई है..

मैंने सुना है वहाँ लाली भई है..

लाली भी जग से निराली भई है..

लाली भी जग से निराली भई है..

अरी..मैंने सुना है वहाँ लाली भई है..

लाली भी जग से निराली भई है..

जाके, लाली के दर्शन पाऊँगी..

जाके, लाली के दर्शन पाऊँगी..

हाँ,.. बधाई ले के आ..उं..गी..

अरे हाँ हाँ बधाई ले के आउंगी..

हाँ बधाई ले के आउंगी..

मैं तो भानु बाबा के डींग जाउंगी..

मैं तो भानु बाबा के डींग जाउंगी..

हाँ,.. बधाई ले के आ..उं..गी..

अरे हाँ हाँ बधाई ले के आउंगी..

बधाई ले के आउंगी..

हाँ बधाई ले के आउंगी..

अरी गौने में लाई जो पचरंग साडी..

गौने में लाई जो पचरंग साडी..

जयपुरिया लहंगा, वा पे गोटे की किनारी..

जयपुरिया लहंगा, वा पे गोटे की किनारी..

गौने में लाई जो पचरंग साडी..

जयपुरिया लहंगा, वा पे गोटे की किनारी..

वा में लहर लहर लहराउंगी..

वा में लहर लहर लहराउंगी..

हाँ,.. बधाई ले के आ..उं..गी..

अरे हाँ हाँ बधाई ले के आउंगी..

हाँ बधाई ले के आउंगी..

मैं तो भानु बाबा के डींग जाउंगी..

मैं तो भानु बाबा के डींग जाउंगी..

हाँ,.. बधाई ले के आ..उं..गी..

अरे हाँ हाँ बधाई ले के आउंगी..

बधाई ले के आउंगी..

हाँ बधाई ले के आउंगी..

ऐरी सखी आज लागी या मन में..

ऐरी सखी आज लागी या मन में..

कब पहुचुंगी मैं श्री महलन में..

कब पहुचुंगी मैं श्री महलन में..

ऐरी सखी आज लागी या मन में..

कब पहुचुंगी मैं श्री महलन में..

मुख निरख निरख बलि जाउंगी..

मुख निरख निरख बलि जाउंगी..

हाँ,.. बधाई ले के आ..उं..गी..

अरे हाँ हाँ बधाई ले के आउंगी..

हाँ बधाई ले के आउंगी..

मैं तो भानु बाबा के डींग जाउंगी..

मैं तो भानु बाबा के डींग जाउंगी..

हाँ,.. बधाई ले के आ..उं..गी..

अरे हाँ हाँ बधाई ले के आउंगी..

बधाई ले के आउंगी..

हाँ बधाई ले के आउंगी..

मैं तो भानु बाबा के डींग जाउंगी..

मैं तो भानु बाबा के डींग जाउंगी..

हाँ बधाई ले के आ..उं..गी..

अरे हाँ हाँ बधाई ले के आउंगी..

अरे हाँ... बधाई ले के आउंगी..

हाँ बधाई ले के आउंगी..

हाँ बधाई ले के आउंगी..

हाँ बधाई ले के आउंगी..

हाँ बधाई ले के आउंगी..

हाँ बधाई ले के आउंगी..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।