जबसे माँ तेरा द्वार मिला

लखबीर सिंह लक्खा
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

दर दर का भटकना छूट गया,

जबसे माँ तेरा द्वार मिला द्वार मिला,

आँखों से बहते आंसू रुके बेटे को माँ प्यार मिला प्यार मिला

मन का हर विकार गया मिल जो तेरा द्वार गया,

विपदा दूर भगी सोइ तकदीर जगी,

मझदार में अटका बेडा जो पल में लगा पार मिला पार,

आँखों से बहते आंसू रुके बेटे को माँ प्यार मिला प्यार मिला

महिमा अपार है माँ पूजे संसार है माँ,

ममता महान तेरी उची है शान तेरी,

भक्ति से शक्ति मिलती है,

जीवन का येही है सार मिला सार मिला सार मिला,

दर दर का भटकना छूट गया....

मांगता मैं वर यही छूटे न दर माँ कही,

तेरा गुण गान रहे चरणों में ध्यान रहे,

लखा की उल्जन सरल हुई माँ से मन का जो तार मिला तार मिला,

आँखों से बहते आंसू रुके बेटे को माँ प्यार मिला प्यार मिला

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।