झूला झूले भवानी

लखबीर सिंह लक्खा
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सावन महीने के रुत मत वाली,

हरे हरे पीपल की उची उची डाली,

डाली में झूला ढाल झूला झूले भवानी,

छोटी सी कन्या का रूप बना के,

छोटी छोटी सखियों को संग भुला के,

लीला रची है कमाल, झूला झूले भवानी,

लाल लाल चूड़ा लाल मेहँदी रचाई,

लाल चुरनिया सिर पे सजाई,

पहन के चोला लाल झूला झूले भवानी,

रेशम की डोरी का रेशम सा चुल्ला

मैया जी को भाये निराला ये झूला,

उड़े पवन की चाल झूला झूले भवानी,

माँ वैष्णो की जब बारी आई,

झूला झुलाये जवाला माई,

कुणी रही संभाल, झूला झूले भवानी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।