बेटा भुलाये झट दोरही चली आये माँ

लखबीर सिंह लक्खा
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

बेटा भुलाये झट दोरही चली आये माँ,

अपने बच्चो के आंसू देख नही पाए माँ,

वेद पुराणों में भी माँ की महिमा का बखान है,

जो भी झुकता माँ चरणों में इसने रचा जहां है,

देव ऋषि भी ना समज पाए ऐसी लीला रचाये माँ,

बेटा भुलाये झट दोरही चली आये माँ...

संकट हरनी वरदानी माँ सबके दुखड़े दूर करे,

शरण में आये दीं दुखी की माँ विनती पूरी करे,

सारा जग जिसको ठुकरा दे उसको गले लगाये माँ,

बेटा भुलाये झट दोरही चली आये माँ..

बिगड़ी तेरी बात बने गई माँ की महिमा गए के देख,

खुशियों से भर जाए गा तू झोली तो फैलाके देख,

झोली छोटी पड़ जाती है देने पर जब आये माँ,

बेटा भुलाये झट दोरही चली आये माँ

कबसे तेरी कचेहरी में लिख के देदी अर्जी,

अपनले चाहे ठुकरा दे आके तेरी मर्जी,

लखा सरल हाथ जोड़े जो भी हुकम सुनादे माँ,

बेटा भुलाये झट दोरही चली आये माँ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।