मैया के आये नवराते

लखबीर सिंह लक्खा
हनुमान जी भजन दुर्गा भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

मैया के आये नवराते मेहर बरसते ,

खजाने खोल कर माँ बैठी,

शहर शहर जगराते भगत करवाते खजाने खोले माँ बैठी

उचे पर्वत गुफा निराली पिंडी रूप में शेरा वाली,

सरस्वती माँ लक्ष्मी माता साथ विराजे माँ महाकाली,

माँ के दर्शन पा लो ओ शीश निभालो सजाके दरबार बैठी,

मैया के आये नवराते .....

कितना सूंदर भवन सजा है सिंह सवारी किसी न्यारी,

भैरव नाथ जी पीछे पीछे तो आगे है बजरंग बलकारी,

सबकी होती सुनवाई सुने महामाई ओ सिंह पे सवार बैठी,

मैया के आये नवराते .......

लाखो बिगड़े भाग सवेरे लाख माँ के खेल न्यारे,

तर जाए गा तू वि गरिरे माँ का नाम जो दिल से पुकारे,

हो जाये वारे न्यारे लुटाने माँ प्यार बैठी,

मैया के आये नवराते .....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।