म्हारो रामजी का चरणा मे मन लाग्यो​​

शंकर शरण जी महाराज
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

म्हारो रामजी का चरणा मे मन लाग्यो​​

​मन लाग्यो , म्हारो तन लाग्यो ​

म्हारो रामजी का चरणा मे। ........

ना भावे मने लाडू - पेड़ा , ना कोई माल मिठाई

म्हारो तुलसी - चरणामर्त में मन लाग्यो ​

म्हारो रामजी का चरणा मे। ........

ना भावे मने सोना - चाँदी , हीरा - मोती

म्हारो तुलसी की माला में मन लाग्यो

म्हारो रामजी का चरणा मे। ........

ना भावे मने महल - मालियाँ , सौद रजाई

म्हारो रामजी का मंदिर में लाग्यो

म्हारो रामजी का चरणा मे। ........

ना भावे मने भाई - बंधू , ना कोई सागा- सनेही ​

म्हारो साधु साधु - संता में ही मन लाग्यो

म्हारो रामजी का चरणा मे। ........ ​

ना भावे मने तोता - मैना , न कोई और जिनावर

म्हारो गोमाता का चरना में मन लाग्यो

म्हारो रामजी का चरणा मे। ........

ना भवे मने बाग - बगीचा , ना कोई सैर सपाटा

म्हारो मथुरा - बृंदावन में मन लाग्यो

म्हारो रामजी का चरणा मे। ........

रचना : शंकर शरण जी महाराज

स्वर : शंकर शरण जी महाराज

पता : हनुमान मंडल (जयपुर- राजस्थान )

फ़ोन :9829125751 , 8118850122

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।