सारे संसार ने पलकों पे बिठा रखा है

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॥ पावन पाठ ॥

सारे संसार ने पलकों पे बिठा रखा है,

जबसे तूने मुझे दीवाना बना रखा है,

तेरे ही दम से मुझे साई जी हयात मिली,

गमो की दुनिया से भी अब मुझे निजात मिली,

अपना दामन मेरे हाथो में थमा रखा है,

सारे संसार ने पलकों पे बिठा रखा है,

चमन में आये नजर काफिले बहरो के,

हां चल रहे दिए चाँद और सितारों के,

मेरी महफ़िल को उजालो ने सजा रखा है

सारे संसार ने पलकों पे बिठा रखा है,

फलक से बिजलियों ने अपना रास्ता मोड़ लिया,

साई की रेहमतो ने हर तरफ से गेर लिया,

अपने दामन में दीवानो को छुपा रखा है,

सारे संसार ने पलकों पे बिठा रखा है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।