पालकी चली साई की पालकी चली

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॥ पावन पाठ ॥

गीत ख़ुशी के गाने लगी है,

ये पटी हर ढाल की घर से अपने लेके चले है साई की हम पालकी,

पालकी चली साई की पालकी चली

सारी दुनिया हो रही है साई जी की जय जय कार,

पहने हुए है अपने गले ने साई फूलो के सूंदर हार,

वसी है सबके दिल में मूरत शिरडी के इस लाल की,

घर से अपने लेके चले है साई की........

दिल की आँखों से इसको देखो अपनी किस्मत चमका लो,

करके साई नाथ के दर्शन जो चाहो सो फल पा लो,

करती है घर घर में उजाला जोति ये कमाल की,

घर से अपने लेके चले है साई की........

छोड़ के ये दो रंगी दुनिया साई शरण तेरी आये,

साई के रंग में रंगके झंडे हाथो में है लहराए,

खेलेगे मिल कर हम होली प्रेम के कुणाल की,

घर से अपने लेके चले है साई की

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।