राधा रानी जी के जन्म की बधाई

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

लाली की सुनके मैं आयी

कीरत मैया दे दे बधाई

लाली की सुनके मैं आयी

कीरत मैया दे दे बधाई

लहंगा भी लुंगी और चुनरी भी लुंगी..

लहंगा भी लुंगी और चुनरी भी लुंगी..

चोली की.. चोली की.. हाँ जी चोली की दे दे सिलाई..

कीरत मैया दे दे बधाई

लाली की सुनके मैं आयी

कीरत मैया दे दे बधाई

कंगना भी लुंगी और झुमका भी लुंगी

कंगना भी लुंगी और झुमका भी लुंगी

नथनी की.. नथनी की.. हाँ जी. नथनी की दे दे गढाई

कीरत मैया दे दे बधाई

लाली की सुनके मैं आयी

कीरत मैया दे दे बधाई

लड्डू भी लुंगी और पेडा भी लुंगी

लड्डू भी लुंगी और पेडा भी लुंगी

दे दे.. दे दे .. हा जी दे दे दूध मलाई

कीरत मैया दे दे बधाई

लाली की सुनके मैं आयी

कीरत मैया दे दे बधाई

21 ना लुंगी और 51 ना लुंगी

21 ना लुंगी और 51 ना लुंगी

क्यों ना लुंगी रे भैया..

हो गयी.. हो गयी.. हाँ जी हो गयी बड़ी महंगाई

कीरत मैया दे दे बधाई

लाली की सुनके मैं आयी

कीरत मैया दे दे बधाई

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।