राधा दौड़ी दौड़ी यमुना पे आई

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

राधा दौड़ी दौड़ी यमुना पे आई,

हो कान्हा कैसी ये प्रीत निभाई वे,

राधा दौड़ी दौड़ी यमुना पे आई

आज तलाक न कुछ भी छुपाया,

फिर क्यों दिल को आज दुखाया,

रोये रोये बोले राधे रानी दो नैनं बरसे पानी,

तूने कर डाली श्याम पराई रे,

राधा दौड़ी दौड़ी यमुना पे आई.......

कैसे कटेगे दिन और रतियाँ,

कैसे जिउगी मैं मन वासियां,

तेरे झूठे पड़ गए वादे पुरे हुए न रह गए आधे,

तूने हासा हासा के रुलाई रे,

राधा दौड़ी दौड़ी यमुना पे आई

मुझसे बड़ी तू सदा रहे गी,

दुनिया तेरा नाम रटेगी,

श्याम से पहले जापे गे राधा,

करता हु मैं पका वाधा,

अब तो करदे हस्स के विदाई रे,

राधा दौड़ी दौड़ी यमुना पे आई

श्याम ने मूड के देखा ना पीछे राधा रो रही अखियां मीचे,

नरेश गंगवाल लिखे कहानी,

दिनेश के नैनं बरसे पानी,

रोये रोये राधे की बिरहा सुनाई रे

राधा दौड़ी दौड़ी यमुना पे आई

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।