फुलवारी कोई उजड़े तो माली सींच सजाये

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॥ पावन पाठ ॥

फुलवारी कोई उजड़े तो माली सींच सजाए ! जब माली ही बाग उजाड़े तो कौन सजाए !!

दुनियां में सबसे पावन भाई भाई का नाता ! जिस माँ ने भाई जन्मे उस माँ को में शीश झुकाता !!

भाई को कोई मारे तो भाई तुरत बचाए ! जब भाई दुश्मन बन जाए तो कौन बचाए !!

सिर की शोभा है साड़ी की शोभा नारी ! साड़ी को पहन के निकले शोभा पाती है नारी !!

जब साडी सिर से सरके तो नारी उसे सधाए ! जब नारी धर्म से सरके तो कौन सधाए !!

सागर में पानी भारी इन्सान देख घबराता ! बल्ली कर में मांझी नैया को पार लगाता !!

नाव कोई जब डूबे तो मांझी पार लगाए ! जब मांझी ही नाव डुबोए तो कौन लगाए !!

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।