तेरी गलियों का मैं हु आशिक

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तेरी गलियों का मैं हु आशिक तू एक नगीना है,

तेरी नजरो से सँवारे जाम पीना है,

तेरी गलियों का मैं हु आशिक तू एक नगीना है,

मेरे हरदम मेरे साथी मेरे साथी हमदम,

तेरी ख़ुशी मेरी ख़ुशी तेरा गम मेरा गम,

तू लाहु है तू जान है तू ही पसीना है,

तेरी गलियों का मैं हु आशिक तू एक नगीना है,

तेरे सिवा कोई दूसरा नहीं मेरा,

छोड़ो नहीं कस के पकड़ा ये दामन तेरा,

तू ही मका तू ही काबा तू ही मदीना,

तेरी गलियों का मैं हु आशिक तू एक नगीना है,

चाहे दो जखम चाहे जन्नत में पोहचंदे मुझको,

या डुबो दे या पार लगा दे मुझको,

तू ही दरिया तू ही साहिल तू ही सफीना है,

तेरी गलियों का मैं हु आशिक तू एक नगीना है,

तेरे बिना एक पल मैं जी नहीं सकता,

ये जुदाई के दर्द को मैं पी नहीं सकता,

तेरी गलियों में सँवारे मरना जीना है,

तेरी गलियों का मैं हु आशिक तू एक नगीना है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।