जगमग जगमग जोत जगी है

पारंपरिक
श्री राम आरती राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

जगमग जगमग जोत जगी है राम आरती होने लगी है,

भक्ति का दीपक प्रेम की बाती,

आरती संत करे दिन राती,

आनंद की सरिता ओ भरी है,

जगमग जगमग जोत जगी है..

कनक शृंगासन सिया समेटा,

बैठे ही राम हुई चित चेता,

राम बाग़ में जनक लली है,

जगमग जगमग जोत जगी

आरती हनुमत के मन भावे

राम कथा नित शंकर गावे,

संतो की ये भीड़ लगी है,

जगमग जगमग जोत जगी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।