आया बुढ़ापा बन्दिया

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॥ पावन पाठ ॥

आया बुढ़ापा बन्दिया वे मूड आनी ना जवानी,

चिठिया वी पाइयाँ बन्दिया वो तारा वी भेजिए,

फिर भी सुन बन्दिया वो तू किती न कानि,

आया बुढ़ापा बन्दिया वे मूड आनी ना जवानी,

सदे वी भेजे बन्दियाँ वो आवाज वी मरियाँ,

नाशिया पत्तियां च पाई रहा मेरा किती मन मानी,

आया बुढ़ापा बन्दिया वे मूड आनी ना जवानी,

लाख चौरासी बन्दिया तू ता भोगी घर आया,

नाम ना जपियां बन्दे वो पूरी होइ ज़िंदगानी,

आया बुढ़ापा बन्दिया वे मूड आनी ना जवानी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।