जय ब्रह्मचारिणी माँ

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

जय माँ ब्रह्मचारिणी, ब्रह्मा को दिया ग्यान।

नवरात्रे के दुसरे दिन सारे करते ध्यान॥

शिव को पाने के लिए किया है तप भारी।

ॐ नमो शिवाय जाप कर शिव की बनी वो प्यारी॥

भक्ति में था कर किया कांटे जैसा शरीर।

फलाहार ही ग्रहण कर सदा रही गंभीर॥

बेलपत्र भी चबाये थे मन में अटल विशवास।

जल से भरा कमंडल ही रखा था अपने पास॥

रूद्राक्ष की माला से करूँ आपका जाप।

माया विषय में फंस रहा, सारे काटो पाप॥

नवरात्रों की माँ, कृपा करदो माँ।

जय ब्रह्मचारिणी माँ, जय ब्रह्मचारिणी माँ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।