भवानी में भैरुनाथ जगावे

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

अम्बे जी भैरुनाथ जगावे,

भवानी ने भैरुनाथ जगावे,

मैया जी भैरुनाथ जगावे,

लटपट पेच सिराने लटके,अंत्र सुगंध ही आवे।

कर अति कोप पवन को पकड़े' पवन सुगंध प्रकटावे॥

भवानी ने भैरुनाथ जगावे.....

लटपट करत धरनी पर लोटत,रुक रुक कर करुणावे।

कर जोड़ा अति विनती करत है, भक बकरा रो भावे॥

भवानी ने भैरुनाथ जगावे....

म घम करत गुघरा गहरा, दम दम डमरू बजावे।

माँ इंद्रेश अर्ज सुन मेरी , रम्बी रसमा चढ़ावे॥

भवानी में भैरुनाथ जगावे......

आवड़ रूप नयन उगाड़ो,महीपति सरने आवे।

इंद्रा झूरे बारे सन्मुख बैठे , देव पुष्प बरसावे॥

भवानी भैरुनाथ जगावे.....

इंद्र नाथ जब नयन उगाड़े’ देव पुष्प बरसावे।

कह हिगलाज दान शुद्ध कीरत‘ बुद्धि जी ने सुयश बनावे॥

मैया जी ने भैरुनाथ जगावे......

गायक गोपजी राजपूत

Bikaner phone no. 8608095434

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।