बाबा तेरी याद आई

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॥ पावन पाठ ॥

सइयां तेरे बिन

बाबा तेरी याद आई,

हो तेरे बिन नहीं लगदा जी मेरा,

हूँ कोई नहीं यहाँ मेरा ओ रतियाँ जाग के बिताई,

बाबा तेरी याद आई......

टुटा हुआ था भिखरा हुआ था तूने मुझे सवारा बाबा,

तेरे बिन एक पल भी जीना मुझको नहीं गवारा,

तू रूठा है तो रूठा है जग सारा,

बाबा तेरी याद आई,

ये तो नहीं है तू जो नहीं तो सांसे नहीं हमारी,

सांसे है पर इन सांसो में खुशबू नहीं तुम्हारी,

इस ज़िंदगी में आके मेरी सांसो को महकाजा,

बाबा तेरी याद आई,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।