आरती जगजननी मैं तेरी गाऊं

पारंपरिक
माता दुर्गा आरती दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आरती जगजननी मैं तेरी गाऊं।

तुम बिन कौन सुने वरदाती,

किस को जा कर विनय सुनाऊं॥

असुरों ने देवों को सताया,

तुमने रूप धरा महामाया।

उसी रूप का मैं दर्शन चाहूँ॥

रक्तबीज मधुकैटब मारे,

अपने भक्तों में काज सँवारे।

मैं भी तेरा दास कहाऊं॥

आरती तेरी करू वरदाती,

हृदय का दीपक नैयनो की भांति।

निसदिन प्रेम की ज्योति जगाऊं॥

ध्यानु भक्त तुमरा यश गाया,

जिस ध्याया, माता फल पाया।

मैं भी दर तेरे सीस झुकाऊं॥

आरती तेरी जो कोई गावे,

चमन सभी सुख सम्पति पावे।

मैया चरण कमल राज चाहूँ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।