मेरे श्याम धणी से नैन लडे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

एक रात में दो दो चांद खिले,

मेरे श्याम धणी से नैन लडे,

अब बैरी जमाना कुछ भी कहे,

नैना अब उनसे बातें करे,

नैनों से छलकता प्यार यहां ,

नहीं देखा हमने और कहीं,

सरवर सी गहराई इसमें,

जो डुबा ना उतरा पार कभी,

मेरे श्याम - - - -

नैना इनके हैं जादुगरे,

जादू जिस पर चल जाता है,

ना होश उसे फिर और कहां,

वो श्याम ही रटता जाता है,

मेरे श्याम - - - -

नैनों को नजर ये आता है,

कुछ और दिखाई ना देता,

श्याम से गहरी प्रीत जुडी,

उषा को जहां से क्या लेना,

मेरे श्याम - - - -

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।