द दे ना वरदान

पारंपरिक
अन्य भजन रानी सती दादी भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

दे दे ना वरदान जो भी तेरा मंगल गायेंगे,

वो खाली कभी ना जायेंगे,

तेरे मंगल की महिमा इतनी बड़ी है मां,

जो सुनता सुनाता है,

तेरी पावन गाथा मां जो भाव से सुनता तेरा हो जाता है,

ओओओ मां तेरा गुणगान गाके सबको सुनायेंगे ,

मां तेरी किरपा पायेंगे,

हे झुंझनु वाली राणीसती दादी जो दर पे आया है,

तेरी क्रीपा से मां है हाजरी लगी,

और मंगल गाया है,

ओओओ तेरा ये मंगल जोभी भाव भक्ति से गायेंगे

मां तेरी किरपा पायेंगे,

ना ज्ञान है श्वर का ना ज्ञान भक्ति का,

ना काबिल तेरे है,

उम्मीद इतनी है तु थाम लेगी मां,

हम बालक तेरे हैं,

ओओओ तेरे आंचल में उषा जीवन वो बितायेंगे,

मां तेरी किरपा पायेंगे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।