जय माँ शैलपुत्री

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

जय माँ शैलपुत्री प्रथम, दक्ष की हो संतान।

नवरात्रे के पहले दिन करें आपका ध्यान ॥

अग्नि कुण्ड में जा कूदी, पति का हुआ अपमान।

अगले जनम में पा लिया शिव के पास स्थान ॥

राजा हिमाचल से मिला पुत्री बन सम्मान।

उमा नाम से पा लिया देवों का वरदान ॥

सजा है दाये हाथ में संघारक त्रिशूल।

बाए हाथ में ले लिया खिला कमल का फूल ॥

बैल है वाहन आपका, जपती हो शिव नाम।

दर्शन ने आनंद मिले अम्बे तुम्हे प्रणाम ॥

नवरात्रों की माँ, कृपा कर दो माँ।

जय माँ शैलपुत्री, जय माँ शैलपुत्री ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।