श्रीकृष्ण मेरे उर में

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

श्रीकृष्ण मेरे उर में, बस आप बसे रहना,

जब भटके मन मेरा, तुम थाम लिया करना,

दुनियाँ तो है सब झूँठी,इक आप सहारे हो,

ठुकरायें सभी तो क्या,जब आप हमारे हो

त्रय-तापों से का, प्रभु आप किया करना,

श्रीकृष्ण मेरे उर में, बस आप बसे रहना,

जब भटके मन मेरा, तुम थाम लिया करना,

टूटे न आस मेरी, छूटे न साथ तेरा,

दुनियाँ के डर से मन, जब हो उदास मेरा,

तब-तब हे दयासागर, मन मोद मेरे भरना,

श्रीकृष्ण मेरे उर में, बस आप बसे रहना,

जब भटके मन मेरा, तुम थाम लिया करना,

(गीत रचना- अशोक कुमार खरे)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।