मेरा नाम है सुदामा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरा नाम है सुदामा मेरे तन पे नहीं यामा,

चला आया हु कन्हैया बड़ी दूर से,

मेरे पाँव में पड़ गए छाले ओ कन्हैया मुरली वाले,

चला आया हु कन्हैया बड़ी दूर से,

ना पाँव में जुतिया मेरे ना सिर पे है पगड़ी,

मेरी और कन्हैया की है यारी सबसे तकड़ी,

रे बचपन का यार तेरा मैं हु घनश्याम,

संग में खेले संग में घूमे संग में दही चुराई,

मेरा नाम है सुदामा मेरे तन पे नहीं यामा....

दवार पाल ये जाकर बोला सुन ये त्रिपुरारी,

खुद का नाम बताता कान्हा तुम से बताता यारी,

इतना ही सुनके दोहरे आये श्याम,

श्याम दोहरे दवार पे आये अपने गले लगाए,

मेरा नाम है सुदामा मेरे तन पे नहीं यामा,

महल में आके शिंगशन पे सुदामा बिठाये,

अपने असुवन की गंगा से श्याम ने चरण धुलाये,

ओ मेहर करि उसपे घनश्याम ने ,

तेरे दर पे आये और शुबाष गीत ये गाये,

मेरा नाम है सुदामा मेरे तन पे नहीं यामा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।