प्रेम नगर की डगर हैं कठिन

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

प्रेम नगर की डगर हैं कठिन रे,

बटोई ना करना वसेरा पग बड़ा हो ना जाए अँधेरा,

प्रेम नगर की डगर हैं कठिन रे.......

यह तन है कोटि नवरियाँ रे प्राणी,

भरने न पाए इस में पापो का पानी,

नादान केवट सम्बल के चलो मीत माया भवर ने है गेरा

पग बड़ा हो न जाए अँधेरा......

मन का रतन रख यतन से अनाड़ी,

यहाँ आगे चोरो की बस्ती है भारी,

ज्ञानी था केरे गुमानी पल में उठ जाए लाखो का बेडा,

पग बड़ा हो न जाए अँधेरा......

बादल भी पतकी अँधेरी है राते है,

भजन सार सब झूठी दुनिया की बाते,

लाखो श्याम पुतरिन में उसकी झलक मीत हो जाये पल में सवेरा,

पग बड़ा हो न जाए अँधेरा......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।