मार जा जिओना पहाड़ी उतो छाल वे,

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सुख तेरी खिड़े मथे किती मंजूर मैं,

कुज गाल दिल वाली दसनी जरूर मैं,

नैना देवी माँ दी गल न तू ताल वे,

मार जा जिओना पहाड़ी उतो छाल वे,

साधु वाला वेश तू बेशक सी बना लिया,

फिर भी पुलिस ने तनु गेरा सी पा लिया,

होंगे ने दीदार करना सवाल वे,

मार जा जिओना पहाड़ी उतो छाल वे,

मेरी आखी गल दा ख्याल पूरा रखी वे,

मारी जदो छाल पीछे मुड़के ना तकी वे,

आगे ज़िंदगानी पीछे मौत काल वे,

मार जा जिओना पहाड़ी उतो छाल वे,

मार के जिओना छाल थोड़ा आगे नसिया,

हो गया गरूर बस पीछे वाल तकिया,

ना ती गोनेआने मौत पाया जाल वे,

मार जा जिओना पहाड़ी उतो छाल वे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।