बनके इंसान फरिश्ता लुटाने रेहमत

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॥ पावन पाठ ॥

बनके इंसान फरिश्ता लुटाने रेहमत शिरडी में आया,

शिरडी में आया सेवा में दीन दुखी की साई ने अपना जीवन लुटाया,

सतगुरु साई निर्गुण रूपा दिवय आत्मा दिव्य सवरूपा,

पुण्य की बारिश करके शिरडी को तीरथ बनाया,

बनके इंसान फरिश्ता लुटाने रेहमत शिरडी में आया,

होने लगे है शिरडी में जलसे दीपक जलाये जो तुम ने जलसे,

श्रद्धा सबुरी का सूरज संदेशा सताय का लेके आया,

बनके इंसान फरिश्ता लुटाने रेहमत शिरडी में आया,

गुलशन बन जाए दिल वो दीवाना साई जो बन जाए तेरा दीवाना,

सबका मालिक एक है लाख को तुमने यही समझाया,

बनके इंसान फरिश्ता लुटाने रेहमत शिरडी में आया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।