बोले साईं का एक तारा

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॥ पावन पाठ ॥

बोलो साईं का एक तारा तुनक तुनक तुनक तुन,

का ध्यान है मन में तेरा जरा ले सुन सुन सुन

क्यों संकट से गबराए शिर्डी दर क्यों नही आये,

समज ले धुन धुन धुन.....

उपर वाला वहा पे बेठा है रे बनके जोगी,

वाहा पे जाते है दुनिया के सारे मन के रोगी,

सब छोड़ के दुःख के कांटे खुशियों के फूल उठाते,

ले तू भी चुन चुन चुन....

उसका दर है इसा कोई संकट वाहा न ठहरे,

चारो दिशायो में उसके तो आँखों के है पहरे,

सब छोड़ के दुनिया दारी बस आजा तू एक वारी,

ले राहे चुन चुन चुन...

साईं जी का एक तारा कब से तुझसे बोले,

अपनी किस्मत खोल वाहा वो सबकी किस्मत खोले,

नही उस जैसा कोई दानी ये बात सभी ने मानी,

तू सपने भुन भुन भुन....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।