ये किसका प्यार महका

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ये किसका प्यार महका, ये किसका प्यार महका,

मेरी मुरली बोले कुहुक-कुहुक, ये किसका प्यार महका,

ये किसने तान छेड़ी, ये किसने तान छेड़ी,

तन मेरा, जाये लचक-लचक, किसने तान छेड़ी,

तेरी मुरली में है जादू, सुन हो गई मैं दीवानी ॥

तान तेरी कर देगी, मुझे बेसुध, मैं ये जानी,

जिया मेरा, जाये मचल-मचल, किसने तान छेड़ी,

ये किसका प्यार महका,

मेरी मुरली बोले कुहुक-कुहुक, ये किसका प्यार महका,

मेरी श्यामा, तूँ दीवानी, हुई कैसे मैं क्या जानूँ,॥

मेरी मुरली, में है जादू, बात तेरी मैं न मानूँ,

तेरी पायल बोले झनक-झनक, किसका प्यार महका,

ये किसने तान छेड़ी,

तन मेरा, जाये लचक-लचक, किसने तान छेड़ी,

मेरे कान्हाँ, मैं हूँ तेरी, तूँ है मेरा, जग जाने,॥

मेरी श्यामा, तूँ है मेरी, मेरा जिया, यही मानें,

श्याम-श्यामा, नहीं बिलग-बिलग, किसका प्यार महका,

ये किसने तान छेड़ी,

तन मेरा, जाये लचक-लचक,

किसका प्यार महका,

मेरी मुरली बोले कुहुक-कुहुक, किसका प्यार महका,

(गीत रचना- अशोक कुमार खरे)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।