मैया जी मेरे दर दे सिर पे हाथ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरी याद करू फर्याद करू तेरी कब से देखु बात,

मैया जी मेरे दर दे सिर पे हाथ,

तू मेरी मैं तेरा दाती फिर क्यों रखती दुरी,

मन भावे दिल से जावे मेरी सुन ले न तू बात,

मैया जी मेरे दर दे सिर पे हाथ...

मगन राहु मैं तेरी भक्ति में ऐसा दो वरदान,

कुछ ख़ास करो पारखास करो करो किरपा की बरसात,

मैया जी मेरे दर दे सिर पे हाथ......

तेरी बिना मेरा जी न लागे तड़के चांदनी रात,

ना देर करो माँ मेहर करो करो सब बातो के ठाट,

मैया जी मेरे दर दे सिर पे हाथ......

हरिओम पराशर तेरी शरण में तुझपे है विशवाश,

माँ ज्ञान दियो वरदान दियो मेरा आप निभादे साथ,

मैया जी मेरे दर दे सिर पे हाथ......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।