जब जब हम दादी जी का मंगल पाठ करते है,

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

जब जब हम दादी जी का मंगल पाठ करते है,

ऐसा लगता है माँ से दिल की बात करते है,

जब जब हम दादी जी का मंगल पाठ करते है,

ये मंगल पाठ है ऐसा दादी से मिलता है,

इस पाठ से घर आंगन पवन हो जाता है,

जब हम ये मंगल पाठ सबके साथ करते है

ऐसा लगता है माँ से दिल की बात करते है,

जब जब हम दादी जी का मंगल पाठ करते है,

जब गाते है हम मंगल मेरी दादी सुनती है,

दोरही आती है दादी पल भर न रुक ती है,

जब सच्चे मन से हम दादी को याद करते है,

ऐसा लगता है माँ से दिल की बात करते है,

जब जब हम दादी जी का मंगल पाठ करते है,

जिसने भी मन से एक बार ये मंगल पाठ किया,

उनके घर और आंगन में दादी ने वास किया,

इस लिए भजन दादी का हम दिन रात करते है,

ऐसा लगता है माँ से दिल की बात करते है,

जब जब हम दादी जी का मंगल पाठ करते है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।